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Wednesday, September 5, 2018

यह हिन्दूस्तान कहां है ? भारत हिन्दूस्तान है या भारत - Bharat Hindustan Hai Ya Bharat -Hindustan Kaha hai

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यह हिन्दूस्तान कहां है ???   
15/08/2018 के दिन
लाल क़िले से आपने देखा और सुना कि भारत देश के प्रधानमंत्री बार-बार लगातार "हिंदुस्तान-हिं
दुस्तान" कहे जा रहे थे। अब सवाल यह है कि, क्या वास्तव में दुनिया के नक्शे में " हिन्दुस्तान" नाम का कोई देश है ?
हमें तो विश्व के नक्शे में "हिन्दुस्तान" नाम का देश दिखाई नहीं देता। हिंदुस्तान नाम का देश विश्व के नक्शे में दिखाई नहीं देना इस बात का सबूत है । दुनिया में " हिन्दुस्तान" नाम का कोई भी देश अस्तित्व में नहीं है। फिर भी बार-बार लगातार भारत को हिन्दुस्तान कहना कौन से रणनीति का हिस्सा है।
"हिन्दुस्तान" शब्द की सोच वैदिक ब्राह्मणमनुवादियों के दिमाग की उपज है। भारत देश को हिन्दुस्थान करने पर तुले हुए वैदिक ब्राह्मणमनुवादि लोग वैदिक धर्म को "हिन्दुत्व"का चोला पहनाकर वैदिक परंपरा को संस्कार तथा सांस्कृति के धरोअर का नाम देकर वैदिक व्यवस्था को "हिन्दुत्व" के नाम से देश पर जबरन थोपना चाहते है। लेकिन सच्चाई यह है के देश के धरोहर के पन्नों में "हिंदू" नाम का इतिहास नहीं है ,लेकिन "भारत" नाम का इतिहास है।इतिहास से जानकारी मिलती है। हिन्दू फ़ारसी का शब्द है । हिन्दू शब्द न तो वेदो में है, न पुराण में ,न उपनिषद में ,न आरण्यक में ,न रामायण में, न ही महाभारत में और गीता में भी हिन्दू शब्द नहीं है।स्वयं दयानन्दसरस्वती कबूल करते हैं कि यह हिन्दु शब्द विदेशी आक्रमणकारियों ने दिया हुआ शब्द है,1875 में ब्राह्मण दयानन्द सरस्वती ने आर्य समाज की स्थापना की, हिन्दू समाज की नहीं । अनपढ़ ब्राह्मण भी यह बात जानता है । ब्राह्मणो ने स्वयं को हिन्दू कभीनहीं कहा । आज भी वे स्वयं को ब्राह्मण कहते हैं ,लेकिन सभी शूद्रों को हिन्दू कहते हैं ।
इतिहास गवाह है यह देश वैदिक ब्राह्मणों के गैर बराबरी की जाति व्यवस्था के कारण ७०० साल मुसलमानों के और १५० साल अंग्रेजो के गुलामी की विरासत रहा है।
अक्सर देखा गया है के अधिक दिनों तक गुलाम रहे राष्ट्र के लोगों में एक मनोवैज्ञानिक तथ्य बैठ जाता है,उनके दिल और दिमाग में भूतकाल के प्रति एक ऐसी भावना घर कर जाती है, जिसमें सिवाय भ्रम और दिल को बहलाने के सिवाय कुछ नहीं होता, इसी मानसिक भ्रम के कारण वैदिक मनुवादिब्राह्मण भारत को काल्पनिक "हिन्दुस्तान" कहता है।
जब देश गुलाम था तब गुलामी में यह भ्रम ठीक है लेकिन आजादी में देश का संविधान बनाया गया तब संविधान में स्पष्टता से लिखा है। "भारत अर्थात इडिया"।
फिर भी वैदिक ब्राह्मण मनुवादि भारत को हिन्दुस्तान क्यों कहते है?
वैदिक मनुवादि ब्राह्मण भारत देश को हिन्दुस्तान इसलिए कहते क्योंकि उन्हें 'हिंदुत्व' के नाम से भारत में "राजनीतिक राष्ट्रवाद" लाना चाहते है। राजनीतिक राष्ट्रवाद के लिये सबसे पहले जरूरत है देश को धर्मविशेष धार्मिक नाम की पहचान देना,यह वही रणनीति है जिसके तहत वैदिक मनुवादि ब्राह्मण भारत को 'हिन्दुस्तान' कहता है और भारत के लोगों की पहचान 'हिंदुत्व' से करवाता है।
हिंदुस्तान और हिंदुत्व के प्रचार-प्रसार से वैदिक मनुवादिब्राह्मणोंने "राजनीतिक राष्ट्रवाद" को जन्म दिया। आज पुरे भारत देश केलिए "राजनीतिक राष्ट्रवाद" की भावना विष का कार्य कर रही है और राष्ट्र के समस्त प्रगति, विकास और सुधार के पथ में भयानक बाधा बनी है।देश के लोकतंत्र को सबसे अधिक धोखा मौजूदा "राजनीतिक राष्ट्रवाद है।" देश में राजनीतिक राष्ट्रवाद का भयानक रूप तब दिखाई देता है, जब धन्ना सेठो का धन और राजनीति में अनैतिक गठबंधन होता है और यही अनैतिक गठबंधन से "भयभीत राजनीतिक राष्ट्रवाद" का जन्म होता है।
राजनीति और धन्नासेठो का धन इन दोनों के चपेट में जब मिडिया आता है तब किसी एक व्यक्ति को देश से भी उंचा उठाने की कोशिश होती है और जब यह कोशिश कामियाब होती है तब उस व्यक्ति का कद देश से भी उंचा बनाया जाता है। जब यह उंचा व्यक्ति जो भी निर्णय लेता है उन्हें देश सेवा के साथ जोड़ा जाता हैं, अगर कोई इनके लिये गयें निर्णय की अलोचना करता है तब उसे देशद्रोही और राष्ट्रद्रोही घोषित किया जाता हैं।
राजनीतिक राष्ट्रवाद की यह बेतुकी संस्कार और संस्कृति आनेवाले समय में भारत देश के लिये घातक और खतरनाक प्रवृत्ति साबित होने वाली है, क्यों की इतिहास के पन्नों में इसका एक ही सबुत काफी है।"
हिटलर ने कहा था - सच्चा जर्मनी वही हैं जो नाजी पार्टी का सदस्य हैं और यहुदियो से नफरत करता हैं ठीक उसी प्रकार आज के राजनीतिक राष्ट्रवादी देशभक्त कहते हैं की "सच्चा हिंदुस्तानी वही हैं जो संघ में शामिल हैं ओर मुसलमानो से नफरत करते हैं।
हिटलर ने यहुदियो को जर्मनी का दुश्मन बताकर उनके खिलाफ तीव्र घ्रणा के जरिये अपनी राजनीति का आधार तेैयार किया था उसी प्रकार यह संघी मुस्लिमो के प्रति नफरत फेला कर वही काम करना चाहते हैं।
आज भारत में एक व्यक्ति को देश से उंचा बनाने के लिए जो राजनीतिक राष्ट्रवाद का खेल खेला जा रहा है, यह खेल तो डॉ बाबासाहब अंबेडकर के समय भी खेला गया था। जब भारत ब्रिटिश भारत था और अग्रेंज सरकार ने भारत के अछुता के लिए हक और अधिकार देने की घोषणा की तब गांधीजी ने इन हक और अधिकार देने के विरोध में पुणा के येरवडा जेल में आमरण अनशन शुरू किया, दिन ब दिन गांधीजी की तबियत बिगड़ती देख भारत का मिडिया और राजनीतिक राष्ट्रवाद के भक्त डॉ बाबासाहब अंबेडकर को देश का गद्दार, राष्ट्र द्रोही, देश द्रोही कहने लगे, क्योंकि उस समय गांधीजी को भारत के धन्ना सेठोने और मिडिया ने देश से भी उंचा उठाया था तो स्वाभाविक है, राजनीतिक राष्ट्रवादी डॉ बाबासाहब अंबेडकर को मारने और मरने के खुन से खत लिखे, देश हित और समाज हितों के ध्यान में रखते हुये पुणा पॅक्ट हुआ तब मिडिया के सामने डॉ बाबासाहब अंबेडकर ने राजनीतिक राष्ट्रवाद के भक्तों को कहा *"मै प्रथम भारतीय हुं और अंत: भारतीय ही रहुंगा ।"
देश के प्रति डॉ बाबासाहब अंबेडकर जी की यही कमिटमेंट हमारी अपनी प्रतिबद्धता बन जाती हैं। क्योंकि जब देश के प्रधानमंत्री लाल क़िले से देश के लोगों को तथा विश्व के लोगों को संविधान के विरोध में भारत को "हिंदुस्तान" कहते हैं तब आनेवाले समय में देश के संविधान को ही खतरा है, यह स्पष्ट है।
भारत देश में आनेवाले समय में राजनीतिक राष्ट्रवाद के विरोध में भारत का संविधान ऐसा कडा संघर्ष होना तय है।इसीलिए भारत के लोगों को संविधान के सम्मान में लंबी लडाई के लिए तैयार होना है ।
जय भारत

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